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इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना

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इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना  लोगों के लिये राहत की ख़बर  राजस्थान सरकार द्वारा इंदिरा गाधी शहरी रोजगार गारंटी योजना का शुरूआत 9 सितंबर 2022 को किया गया है. इसका लाभ राज्य के नागरिक ले सकेंगें. इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को रोजगार मुहैया कराना है.  कोरोना काल ने आम जीवन को बेहद प्रभावित किया है. लोगों का रोजगार छुट गया, रोजगार पाने के लिए मजदूरों को मजबूरी में एक जगह से दूसरे जगह, एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवासन होना पड़ता था. लेकिन राजस्थान सरकार के इस कदम ने लोगों को राहत दी है. खासकर तब जब जीएसटी आसमान छू रही है जिसके कारण मंहगाई आग की तरह तेजी से बढ़ रही है. आम जीवन को आनाज के साथ-साथ जीएसटी भरने की भी मुसिबतों का सामना करना पड़ रहा है. इस योजना के तहत नागरिकों को साल में 100 से 125 दिन का रोजगार दिया जायेगा.  क्या है इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना राजस्थान सरकार ने वर्ष 2022 में इन योजना के लिए खास 800 करोड़ का बजट तैयार किया है. जिसका उद्देश्य ही शहरी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को रोजगार प्रद...

कैसा रहा एनवी रमण का कार्यकाल

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कैसा रहा एनवी रमण का कार्यकाल भारत के मुख्य न्यायधीश एनवी रमण का कार्यकाल 26 अगस्त 2022 को समाप्त होगा. उन्होंने 48वें मुख्य न्यायधीश के रूप में अपना कार्यभार 24 अप्रैल 2021 में ग्रहण किया था. जीवन परिचय एनवी रमणा का पूरा नाम नूतलपाटि वेंकट रमण हैं. उनका जन्म 27 अगस्त 1957 को एक आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पोन्नावरम गांव में एक किसान परिवार में हुआ. एनवी. रमण ने अपनी डिग्री बीएससी और लॉ विषय में ली. इस दौरान वो छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे. एक छात्र नेता के रूप में वह 1975 के आपातकाल के विरोध में सक्रिय रूप से शामिल थे. कानून में शामिल होने से पहले उन्होंने कुछ समय तक एक पत्रकार के रूप में भी काम किया. 10 फरवरी 1983  को उन्होंने वकालत शुरू की और तब से लेकर आजतक करीब 38 साल से न्याय क्षेत्र में अलग-अलग भूमिका निभा रहे हैं.   न्याय क्षेत्र का शुरुआती का सफर - एन. वी. रमण आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट, सेंट्रल और आंध्र प्रदेश एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस की.  - कॉन्स्टिट्यूशनल, क्रिमिनल, सर्विस और इंटर-स्टेट रिवर लॉ में उनकी ...

इस वर्ष तिरंगे की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी

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इस वर्ष तिरंगे की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी 'हर घर तिरंगा’ अभियान में लगभग 500 करोड़ रुपये का कारोबार देश की आजादी के 75वें वर्ष में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत ‘हर घर तिरंगा’ अभियान शुरू किया गया. जिसका सीधा फायदा झंडा बनाने वाले कारोबारियों के साथ-सथ ू टकर में और सड़कों पर झंडा बेजने वालों को हुआ है. इस वर्ष लगभग 500 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर तिरंगा आंदोलन को मजबूत करने के लिए लोगों से झंड़ा फहराने की अपील की थी. इसके साथ ही उन्होंने 2 अगस्त से सोशल मीडिया की प्रोफाइल फोटो में तिरंगा लगाने का भी आग्रह किया था. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने भी कहा कि राष्ट्रभक्ति और स्व-रोजगार से जुड़े इस अभियान ने पूरे देश में लोगों के बीच देशभक्ति की भावना के साथ-साथ को-ऑपरेटिव व्यापार की बड़ी संभावनाएं खोल दी है. तिरंगे की बिक्री में 50 गुना का इजाफा रहा व्यापारियों के अनुसार हर दिन 25 लाख झंडे बन रहे थे फिर भी बाजार में झंडे की कमी नज़र आई. इस साल राष्ट्रीय ध्वज की मांग पिछले सालों के मुताबिक बहुत अधिक रही. लेकिन कारोबारियों के ...

झारखंड में सुखाड़ की आहट

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झारखंड में सुखाड़ की आहट  झारखंड में सूखाग्रस्त से हालत गंभीर  झारखंड में सुखाड़ की आशंका को लेकर कृषि विभाग सतर्क हो गया है. इसके लिए राज्य सरकार ने अपने अधिकारियों को झारखंड के सभी 24 जिलों से सुखे की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव ने अधिकारियों को 10 अगस्त तक पूरी रिपोर्ट देने के निर्देश के साथ तत्काल रवाना होने को कहा है. विभाग की ओर से जिलों में एक-एक वरीय अधिकारी भेजे गए हैं और उन्हें केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित फार्मेट पर अपनी रिपोर्ट देनी है. इसी के आधार पर राज्य सरकार विभिन्न जिलों में सूखाग्रस्त की स्थिति पर घोषणा करेगी. मानसून खत्म होने वाला है लेकिन बारिश का नामोनिशान तक नज़र नहीं आ रहा. किसानों की परेशानी और खौफ बढ़ती ही जा रही है. किसान अपनी निगाहें आसमान की ओर लगाए बैठे है. बादल तो छा रहे है लेकिन पर्याप्त मात्रा में वर्षा नहीं हो रही. सबसे कम बारिश की वजह से बुआई का काम काफी प्रभावित है. अब किसानों की हिम्मत टूटती हुई नज़र आ रही है और सरकार से आस लगाए हुए बैठी है. इस साल अच्छी बरसात ना होन...

भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति महिला द्रौपदी मुर्मू

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भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति महिला द्रौपदी मुर्मू  पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति है. इसके साथ ही भारत की पहली आदिवासी और प्रतिभा पाटिल के बाद देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बनी है. रामनाथ कोविंद के 5 साल का कार्यकाल पूरे होने के बाद एनडीए ने द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार चुना. 18 जुलाई 2022 को राष्ट्रपति पद के लिए मतदान किया गया. 23 जुलाई को यशवंत सिन्हा से अधिक वोट मिलने के बाद उन्होंने जीत हासिल कर ली और 25 जुलाई 2022 को न्यायाधीश एनवी रमण द्वारा उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण कराया गया. द्रौपदी मुर्मू का जीवन परिचय द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 में बइदापोसी गाँव, मयूरभंज, ओडिसा में हुआ था. उनके पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडु जो कि गाँव के मुखिया भी थे. इसके बावजूद मुर्मू का जीवन संघर्षो में बीता. द्रौपदी मुर्मू के पति का नाम स्व: श्याम चरण मुर्मू था जो कि एक बैंक कर्मचारी थे. मुर्मू जी के कुल दो पुत्र और एक बेटी हुई. लेकिन पति और दो पुत्रों का निधन हो गया. इसके बाद भी द्रौपदी मुर्मू हार नहीं मानी और अपनी ...

मात्र 10 रुपये में गरीबों की भूख मिटाती है रोटी बैंक

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मात्र 10 रुपये में गरीबों की भूख मिटाती है रोटी बैंक शान्ति लकड़ा / राँची     राँची में रोटी बैंक नाम की संस्था लोगों के लिये भोजन उपलब्ध करवा रही है। रोटी बैंक मात्र 10 रुपये में लोगों को सम्पूर्ण भोजन देती है। इस संस्था के माध्यम से गरीब मजदूरों और असहाय व्यक्तियों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। रोटी बैंक संस्था का राँची में विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाया जाता है। राँची के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के बाहर भी इस संस्था की शाखा है। महंगाई के इस दौर में रोटी बैंक नामक है।  यह संस्था अपने विभिन्न शाखाओं के माध्यम से लोगों को भोजन उपलब्ध करवाती है। इस संस्था के द्वारा 10 रुपये के नाम मात्र शुल्क में भोजन दिया जाता है। गरीब तबके के बड़ी संख्या में लोग रोटी बैंक से भोजन प्राप्त करते हैं। वहां भोजन करने आये लोगों का कहना है कि उनके लिए रोटी बैंक बहुत मददगार है। उनके पास इतने पर्याप्त पैसे नहीं होते कि बाहर से भोजन कर सके। रोटी बैंक उन्हें 10 रुपये में पेट भर भोजन खिला रही है। इन सब के बीच बहुत से लोग ऐसे है जो बाहर का खाना मतलब " रोटी बैंक " का नाम लेते हैं। संस्था ग...

21वीं सदी में बुनयादी सुवधिाओं के लिए जूझता यह गांव

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21वीं सदी में बुनयादी सुवधिाओं के लिए जूझता यह गांव शांति लकड़ा / रांची झारखण्ड की राजधानी रांची में एक ऐसा भी गांव  सूचना क्रांति के दौर में झारखण्ड की राजधानी रांची में एक ऐसा भी गांव है, जो मूलभूत सरकारी योजनाओं से भी कोसों दूर है। झारखण्ड आदिवासी सशक्तिकरण एवं आजीविका परियोजना के तहत, गांव में एक ही निर्माण किया गया लेकिन वो भी व्यर्थ रहा। ग्रामवासियों का कहना है कि बाहर का गंदा पानी कुएं में जाता है, इसलिए कुएं का पानी पीने लायक नहीं रहता है। मामला रांची के जोन्हा क्षेत्र के पिपरा टोली गांव का है। जो पहाड़ियों से घिरा हुआ है। एक तरफ सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों की मदद कर रही है, वहीं इस गांव के लोग सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में सड़क और पानी ना होने के कारण उन्हें काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।  अभी वह लोग नदी के किनारे बहते पझरे पानी पर निर्भर हैं। पीने के पानी के लिए उन्हें जर्जर रास्तों से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार रास्तों में कीड़े-मकोड़ों और जहरीले सांपों का भी सा...