इस वर्ष तिरंगे की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी
इस वर्ष तिरंगे की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी
'हर घर तिरंगा’ अभियान में लगभग 500 करोड़ रुपये का कारोबार
देश की आजादी के 75वें वर्ष में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत ‘हर घर तिरंगा’ अभियान शुरू किया गया. जिसका सीधा फायदा झंडा बनाने वाले कारोबारियों के साथ-सथ ू टकर में और सड़कों पर झंडा बेजने वालों को हुआ है. इस वर्ष लगभग 500 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर तिरंगा आंदोलन को मजबूत करने के लिए लोगों से झंड़ा फहराने की अपील की थी. इसके साथ ही उन्होंने 2 अगस्त से सोशल मीडिया की प्रोफाइल फोटो में तिरंगा लगाने का भी आग्रह किया था.
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने भी कहा कि राष्ट्रभक्ति और स्व-रोजगार से जुड़े इस अभियान ने पूरे देश में लोगों के बीच देशभक्ति की भावना के साथ-साथ को-ऑपरेटिव व्यापार की बड़ी संभावनाएं खोल दी है.
तिरंगे की बिक्री में 50 गुना का इजाफा रहा
व्यापारियों के अनुसार हर दिन 25 लाख झंडे बन रहे थे फिर भी बाजार में झंडे की कमी नज़र आई. इस साल राष्ट्रीय ध्वज की मांग पिछले सालों के मुताबिक बहुत अधिक रही. लेकिन कारोबारियों के लिए तिरंगा की आपूर्ति कर पाना मुश्किल रहा. बिक्री में सभी प्रकार के तिरंगे की 50 फीसदी की बढ़ोतरी हई पर मध्यम आकार के राष्ट्रीय ध्वज की मांग सबसे अधिक रहा. सबसे ज्यादा ऑर्डर गुजरात में सूरत के करोबारियों को मिले है.
इस वर्ष भारतीय ध्वज संहिता में क्या बदलाव रहा
- पहले तिरंगा खादी और दूसरे कपड़े से ही बानाया जाता था.
- मगर इस बार भारतीय ध्वज संहिता में बदलाव करते हुए सरकार ने पॉलिएस्टर व मशीनों से भी झंडे बनाने को मंजूरी दी.
इसको देखते हुए कई व्यापारियों ने पहली बार तिरंगा बनाने का काम भी शुरू किया.
कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स के अनुसार, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, ओडिसा, बिहार, राजस्थान, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में बेहद बड़े स्तर पर तिरंगे झंडे तैयार करने का काम चला. छोटे से लेकर बड़े साइज के झंडे तैयार किए गए और देश भर में इन झंडों की सप्लाई का काम भी जारी रहा.
केंद्र सरकार ने 20 जुलाई को फ्लैग कोड में बदलाव किया जिसके बाद राष्ट्रीय ध्वज को हर घर पर लगाया जाना आसान हो गया था. संशोधन के बाद केंद्र सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत, केंद्र सरकार का लक्ष्य भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर 13 से 15 अगस्त तक घरों के ऊपर कम से कम 20 करोड़ झंडे लगाने का था जिसके बाद तिरंगे झंडे खरीदने में ज्यादा तेजी दिखाई दी.
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